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कुल्लू में नाबालिग को देह व्यापार में धकेला, मां समेत 3 दोषियों को 10 साल की सजा

कुल्लू की विशेष अदालत ने नाबालिग से जबरन देह व्यापार मामले में तीन दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई
पीड़िता की मां समेत तीनों को मानव तस्करी, पॉक्सो और अनैतिक व्यापार अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया
2018 के मामले में 14 गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुनाया फैसला


कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में मानव तस्करी, नाबालिग से जबरन देह व्यापार और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े एक गंभीर मामले में विशेष अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश प्रकाश चंद राणा की अदालत ने पीड़ित बच्ची की मां सहित तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है।

दोषियों में शिव शंकर उर्फ सिकंदर, नितिन जैन उर्फ मन्नू और पीड़िता की मां शामिल हैं। अदालत ने तीनों को भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम तथा अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया।

यह मामला 29 अप्रैल 2018 को सामने आया था, जब चाइल्ड हेल्पलाइन मनाली की टीम पीड़ित बच्ची को थाना मनाली लेकर पहुंची थी। बच्ची की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

पुलिस जांच में सामने आया कि नाबालिग को जान से मारने की धमकी देकर जबरन देह व्यापार में धकेला गया। पीड़िता ने अपने बयान में आरोप लगाया कि उसकी मां ने भी उसे इस अवैध धंधे में शामिल किया था। जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी शिव शंकर उर्फ सिकंदर ने पीड़िता की मां को हर महीने 40 हजार रुपये देने का वादा किया था। पुलिस के अनुसार, शिव शंकर और नितिन जैन मिलकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य पेश किए। अदालत ने सभी साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत का यह फैसला नाबालिगों के शोषण, मानव तस्करी और यौन अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है।